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Showing posts from October, 2018

जयपुर से देश के घर घर तक ! | Story of Indibni

जयपुर की छोटी सी दुकान से देश के घर घर तक ! How a Jaipur’s startup Indibni, becomes the face for Amazon India.



Business Summary Indibni® is a leading Indian Indigenous Content Production company. The seeds of this brand were sown in the soil of Jaipur in the year 2012 by Nitin Jain & Ankit Jain. Three 'I' in our name, stands for our commitment to our country: India, Our Industry: Innovation & Ourselves: Individual. Inspired by the roots of India we strive with a mission to Design for Life.
Indigifts® is an Exuberant Brand of Timeless Expressions. We encapsulate all the emotions for every important relation, around events from valuable days like Valentines’ Day, Mothers’ Day, Fathers’ Day to festivals like Raksha Bandhan, Deepawali, Christmas, Birthday, Anniversary, etc. We started with 500 products with a monthly average of 20 to 40 orders; today our catalogue has expanded to envelope 15,000+ products and we process nearly 18,000+ orders in a month via various online marke…

रामराज और आज | Vijayadashami

राम और रावण
सजा रामदरबार, मंचासीन श्रीराम,
द्वंद छिड़ा जी द्वंद छिड़ा,
कौन अधिक प्रिय है राम को,
सीता, लक्ष्मण, हनुमान को, भ्रम पड़ा ?

सीताजी कहे,
मैं राम की अर्धांगिनी,
जन्म जन्मान्तर की संगिनी,
बिना मेरे वे रहे सदा अधूरे ।

लक्ष्मण कहे,
राम मेरे ज्येष्ठ भ्राता,
है हमारा खून का नाता, बिना मेरे,
वे एक कदम भी ना चले ।

हनुमान कहे,
मेरे हृदय में राम का वास,
मुख पे मेरे सिर्फ राम का नाम,
मुझ सी भक्ति से ही प्रभु मिले ।

श्रीराम भी मुस्कुराए,
धर्म संकट का हुआ भान,
किया निर्णय, जो बना मिसाल,
और क्षण में दूर हुआ, सभी का अज्ञान ।

राम नहीं सियावार,
राम नहीं लखन के भाई,
राम नहीं हनुमान कोसाई,
राम तो है निर्विकार,
जहां अहं का रावण बैठा,
राम नहीं मिलेंगे वहां !

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वनवास और आज 

वनवास का वक़्त आया जी,
यह कलियुग की रामायण है।
कैकयी, कौशल्या एक है,
भरत, लक्ष्मण भी एक है।

ख़ाली हाथ राम है,
सीता ही बस साथ है।
मन में कटुता नहीं, करुणा है,
दोनों की ही अग्निपरीक्षा है ।

युद्ध किसी और से नहीं,
अपितु अपने आप से है ।
दशानन नहीं, राग, द्वेष, अहं,
आसक्ति का चौमुखी रावण है।

अब ना कोई पता ठिकाना है…